100+ Latest Gulzar Shayari in Hindi on Love and Life

gulzar-shayari-in-hindi

Hello Friends !! Looking for Gulzar Sahab Shayari? Then this is the right place where you will find all of the famous Gulzar Shayari In Hindi for free to share and Download in PDF.

Whenever we talk about poetry and Shayari one name which came to our mind is the great Gulzar Shahab. Gulzar various variety of Shayari in Hindi on Love, Life, Romance, etc are all-time hits.

We have listened to several love songs written by Gulzar Shahab but reading Gulzar Shayari is a different feel. He has written various poetry on love and several other emotions.

We are going to give you an amazing set of Gulzar Poetry in Hindi Lyrics and Gulzar Shayari In Hindi collection. You will enjoy this collection of Gulzar Shayari in Hindi on Life for sure.


We are compiling some of the best Gulzar Sahab Shayari for you. Read this emotional poetry and share with your loved ones. Here’s a compilation of some of his magical words to warm your hearts.



Best of Gulzar

images-of-gulzar-poetry

images-of-gulzar-poetry

संभाल लो, सहेज लो, समेट लो रिश्तों को
ज़िन्दगी में इतवार इसलिए ही तो आता है

इतवार न आए इश़्क के दफ़्तर में कभी
हर दिन मुहब्बत से गुलज़ार होना चाहिए

गहरी गहरी सांसें ले रहा है
इतवार है.. कुछ घंटों में गुज़र जाएगा

सुकून की बात मत कर ऐ दोस्त
बचपन वाला इतवार अब नहीं आता

गुज़र जाता है इतवार हर बार आकर
फ़ुर्सत तेरी यादों से हमें कहाँ मिलती है

जो हो मुमकिन तो आओ किसी इतवार फुर्सत से
हमको भी तुम्हारे साथ मसरूफ होना हैं ‌

जगा दिया तेरी याद-ए-उल्फत ने वरना
आज इतवार था बहुत देर तक सोते हम

दर्जनों किस्से-कहानी खुद ही चलकर आ गये
उससे मै जब भी मिला इतवार छोटा पड़ गया

Gulzar Shayari Quotes Hindi

gulzar-shayari-with-images

gulzar-shayari-with-images

खुद से भी मिल लेना इक बार
इतवार है आज दोस्तों

अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दें मुझे
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये

इतवार तो तुझसे प्यार करने का बहाना है
तेरे साथ उम्र गुजारने का इरादा हैं




तुम्हारा होना इतवार के दिन जैसा है
कुछ सूझता नहीं बस अच्छा लगता हैं

तुम साथ हो तो हर दिन इतवार है
वरना हर दिन बेकार है

तुम साथ हो तो हर दिन इतवार है
वरना हर दिन बेकार है

होते है चैन के पहर सबके हक़ में
इक माँ के हक़ में मैंने सुकून का इतवार नहीं देखा

वो आई मिली और हम प्यार समझ बैठे
वो एक दिन नहीं आई और हम इतवार समझ बैठे

अब तो इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी मिलावट
छुट्टी तो दिखती है पर सुकून नजर नहीं आता

Gulzar Shayari on Love in Hindi

gulzar-poetry-images

gulzar-poetry-images

वो मेरे स्कूल के आखिरी इतवार सी थी
आई भी एक रोज, फिर कभी ना आने को

पहली दफा इश्क़ पे ऐतबार हुआ
मैंने पलके क्या झुकाई, हर दिन बस इतवार हुआ

तुझसे इश्क़ बचपन के इतवार सा हो गया है
पीछे छूट गया है पर दिल से नहीं छूट रहा है

जिसको दिन-रात देखते थे हम
उसने एक बार भी नहीं देखा
इश्क़ इतने जतन से करते रहे
हमने इतवार भी नहीं देखा

रोज़ ही कुछ न कुछ सीखा जाती है ये हमें
ज़िन्दगी के मदरसे में कोई इतवार नहीं होता

ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं
ना पास रहने से जुड़ जाते हैं
यह तो एहसास के पक्के धागे हैं
जो याद करने से और मजबूत हो जाते हैं

मैंने दबी आवाज़ में पूछा – “मुहब्बत करने लगी हो?”
नज़रें झुका कर वो बोली – “बहुत”

चौदहवीं रात के इस चाँद तले
सुरमई रात में साहिल के क़रीब
दूधिया जोड़े में आ जाए जो तू
ईसा के हाथ से गिर जाए सलीब
बुद्ध का ध्यान चटख जाए ,कसम से
तुझ को बर्दाश्त न कर पाए खुदा भी
दूधिया जोड़े में आ जाए जो तू
चौदहवीं रात के इस चाँद तले !

अगर कभी थक जाओ तो हमसे कहना,
हम उठा लेंगे तुमको अपनी इन बाहों में,
आप एक बार प्यार करके तो देखो हमसे,
हम सारी खुशियां बिछा देंगे आपकी राहों में.

मेरे दिल में एक धड़कन तेरी हैं,
उस धड़कन की कसम तू ज़िन्दगी मेरी है,
मेरी तो हर सांस में एक सांस तेरी हैं,
जो कभी सांस जो रुक जाए तो मौत मेरी हैं.



आपकी दोस्ती ने हमें जीना सिखा दिया,
रोते हुए दिल को हँसना सिखा दिया,
कर्ज़दार रहेंगे हम उस खुदा के,
जिसने आप जैसे दोस्तों से मिला दिया।

*,जिनके ऊपर जिम्मेदारियों का* *बोझ होता है ना*
*साहब…*
*ना तो उन्हें रूठने का हक़ होता है*
*और ना ही टूटने का हक़ होता है..…..!!!*

Also Visit: Motivational Shayari by Gulzar

*कभी वक्त निकाल के, हमसे बातें करके देखना…*
*हम भी बहुत जल्दी, बातों मे आ जाते है*

दर्द सबसे ज्यादा हमें तब होता है ऐ जिंदगी,
जब हम अपना दर्द किसी को बता नहीं पाते !!

ग़म मौत का नहीं है,
ग़म ये के आखिरी वक़्त भी
तू मेरे घर नहीं है….
निचोड़ अपनी आँखों को,
के दो आंसू टपके..
और कुछ तो मेरी लाश को हुस्न मिले…..
डाल दे अपने आँचल का टुकड़ा…
के मेरी मय्यत पे कफ़न नही है

बेबस निगाहों में है तबाही का मंज़र,
और टपकते अश्क की हर बूंद
वफ़ा का इज़हार करती है……..
डूबा है दिल में बेवफाई का खंजर,
लम्हा-ए-बेकसी में तसावुर की दुनिया
मौत का दीदार करती है……….
ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की… और कहेना,
के कफ़न की ख्वाहिश में मेरी लाश
उनके आँचल का इंतज़ार करती है

“तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे…
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे

Gulzar Shayari in Hindi 2 Lines

gulzar-shayari-lyrics

gulzar-shayari-lyrics

तन्हाई की दीवारो पे घुटन का पर्दा झूल रहा है…
बेबसी की छत के नीचे,कोई किसी को भूल रहा है.

तेरे- करम- तो -हैं इतने कि याद हैं अब तक,
तेरे सितम हैं कुछ इतने कि हमको याद नहीं

मेहँदी वाले हाथों के कन्धों से
दुपट्टा सरकना,
आफतें क्या क्या

शायर बनना बहुत आसान है…
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए.

कोई पुछ रहा हे मुजसे मेरी जीन्दगी की कीमंत…. मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना

चंद रातों के खुवाब
उम्र भर की नींद मांगते है

यादों की अलमारी में देखा,
वहां मुहब्बत फटेहाल लटक रही है

ना जाने किस तरह का संग-तराश था वो भी।
मुझे इस तरह तराशा है, के पाश-पाश हो गए हैं

आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है
जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है…

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..
दूसरा सपना देखने के हौसले को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं..



तेरे उतारे हुए दिन पहनके अब भी मैं,
तेरी महक में कई रोज़ काट देता हूँ !!

कि गहरी वादियाँ ख़ाली कभी नहीं होतीं
ये चिलमन बारिशों की भी उठा दूँगा, जब आओगे !

होंठ झुके जब होंठों पर,
साँस उलझी हो साँसों में…
दो जुड़वा होंठों की, बात कहो आँखों से.!!

क्यूं इतने लफजो में मुझे चुनते हो,
इतनी ईंटें लगती है क्या एक खयाल दफनाने में?

बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है…

“पूछ कर अपनी निगाहों से बता दे मुझको,
मेरी राहों के मुकद्दर में सहर है कि नही..”

गुल से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो,
आँधियों तुमने दरख्तों को गिराया होगा।

“कभी कभी तो आवाज़ देकर
मुझको जगाया ख़्वाबो ने..!”

अपने होठों से चुन रहा हूँ
तुम्हारी सासों की आयतों को
कि जिसम के इस हसीन काबे पे
रूह सजदे बिछा रही है।

बहोत अंदर तक जला देती है,
वो शिकायतें जो बयाँ नही होती..

महदूद हैं दुआएँ मेरे अख्तियार में..
हर साँस हो सुकून की तू सौ बरस जिये…

”ये तुमने ठीक कहा है, तुम्हें मिला ना करूं
मगर मुझे ये बता दो कि क्यों उदास हो तुम?”
-Gulzar Hindi Font Shayari

इक उर्म हुई मैं तो हंसी भूल चुका हूँ,
तुम अब भी मेरे दिल को दुखाना नही भूले ।

Humne aksar tumhari rahon mein, Ruk kar apna hi intezar kiya

Kal ka har waqia tumhara tha, aaj ki dastan hamari hai

Tere bina zindagi se koi shikwa toh nahi, tere bina zindagi bhi lekin zindagi nahi

Jab bhi yeh dil udaas-udaas hota hai,
jaane kaun aas paas hota hai,
Koi vaada nahi kiya lekin,
kyun tera intezaar rehta hai…

Aaina dekh kar tasalli hui Humko is ghar mein jaanta hai koi

Thoda hai, thode ki zaroorat hai
Zindagi phir bhi yahaan, Khoobsurat hai

Bahut andar tak jalaa deti hai Woh shikaayatein joh bayaan nahi hoti

Ek hi khwab ne saari raat jagaya hai,
maine har karvat sone ki koshish ki hai

Woh cheez jise dil kehte hai,
Hum bhool gaye hain, rakh ke kahin

Tere jaane se kuch badla toh nahi
Raat bhi aai thi aur chaand bhi tha
Haan magar… neend nahi

Ek sapne ke tootkar Chakna choor ho jaane ke baad
Doosra sapna dekhne ke hausle ko Zindagi kehte hain

Aadatan tumne kar diye vaade,
aadatan humne aitbaar kiya

Apne saaye se chaunk jaate hai,
umra guzri hai iss qadar tanha

Apne auron se kaha sab kuch,
ham se bhi kuch kabhi kahin dete

Haath chhoote bhi toh Rishte nahi chhoda karte,
Waqt ki shaaḳh se Lamhe nahi toda karte

Aaj kal paaon zameen par Nahi padte mere,
Bolo dekha hai kabhi tumne Mujhe udte hue?

Teri yaadon ke joh aakhri the nishaan,
Dil tadapta raha hum mitate rahe,
Khat likhe the joh tumne kabhi pyaar mein ,
Usko padhte rahe aur jalaate rahe

Aadatan tum ne kar diye vaade
Aadatan ham ne aitabaar kiyaa
Terii raahon me baarahaa ruk kar
Hum ne apanaa hii intazaar kiyaa.

Aaiinaa dekh ke tasallii huii ….Hum ko is ghar me jaanataa hai koii.

Zindagi yoon huyi basar tanha
Kaafila saath aur safar tanha
Apne saaye se chaunk jaate hain
Umar guzri hai is kadar tanha.

.

Ek parvaaz dikhayee di hai
Teri aawaz sunayee de rahi hai
Jiski aankhon mein kati thi sadiyaan
Usne sadiyon ki judayee di hai.

Tumhary ghum ki dali utha k zuban p rakhli hai dekho mein ne
Woh qatra qatra pighal rahi hai
Main qatra qatra hi ji raha hun

Ankhon ke pochhne se laga aag ka pata
Yuun chehra pher lene se chhupta nahin dhuan

किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होती

जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें

कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं…!!

दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं…!!

Gulzar Shayari on Friendship

gulzar-shayari-images

gulzar-shayari-images

Shaam se aankh mein namin si hai
Aaj fir aapki kami si hai
Koi rishtha nahin raha
fir bhi ek tasleem* laazmi si hai.

Ksne raste mein chaand rakha tha
Mujh ko thokar wahan lagi kaise
Waqt pe paaon kab rakha hamne
Zindagi muhh ke bal giri kaise.

Phoolon ki tarah lab khol kabhie
Khushboo ki jubaan mein bol kabhie.

Haath chooten bhi to rishtey nahin choda karte
Waqt ki shaak se lamhein nahin toda karte

Jiski aawaaz mein silwat ho nigahon mein shikan
Aisi tasvir ke tukde nahi joda karte

Lagke saahil se jo behta hai use behne do
Aisi dariya ka kabhi rukh nahin moda karte

Halake halake kohare ke dhuae mein
Shayad aasamaan tak aa gayii hoo
Terii do nigaahon ke sahaare
Dekhoo to kahaa tak aa gayii hoo.

Umare lagee kehate huve, do lavz the ik bat thee
Woh ik din sau sal ka, sau sal kee woh rat thee.

Aankho ne kahee aur juba ho gayee
Itni see kasam dastan ho gayee.

आज बिछड़े हैं, कल का डर भी नहीं
जिन्दगी इतनी मुख़्तसर भी नहीं

Jaane kya sochke iss baar meri aankh jhuki hai
Aap ko dekh ke badi der se meri saans ruki hai

Honth pe liye hue dil kii baat ham
Jaagate rahenge aur kitnii raat ham

Chhuti he mujhe sargoshi se, aankho me ghuli khamoshi se
Main farsh pe sajde karta hu, kuch hosh me kuch behoshi se.

Aap kii baton me phir koii shararat to nahi
Bewajeh tariif karna aap kii aadat to nahi.

Aisa koi zindagii se vaada to nahi tha
Tere bina jine kaa iraada to nahi tha.

Main sochataa thaa, meraa naam gunagunaa rahii hai vo
Na jaane kyun lagaa mujhe, ke muskuraa rahii hai vo

Chalo aaj intezaar khatam hua
Chalo ab tum mil hi jaaoge
Maut ka koi fayda to hua.

Maut darati rahi har baar yun ki
Zindagi ka satana kam sa laga
Maut ki dehlij se nikle
To zindagi ke khauf se takra gaye.

Ye mana is dauran kuch saal beet gaye hai
Phir bhi aankhon me chehra tumhara samae hue hai
Kitabon pe dhul jamne se kahani kaha badalti hai

Aankh to bhar gayi thi paani se
Teri tasviir jal gai kaise.

Mujhe aaj koi aur na rang lagao
Purana laal rang ek abhi bhi taaza hai
Armaano ka khoon hue zyaada din nahii hua hai.

Woh mere saath hi tha dur tak magar ek din
Jo mudh ke dekha to wo dost mere saath na tha
Fatee ho jeb to kuch sikke kho bhi jaate hai

Koi surat bhi mujhe puri nazzar nahi aati
Aankh ke shishe mere bikhre hue he kab se
Tukron tukron me sabhi log mile he mujhko !

Kabhi kabhi bazaar me yu ho jata he
Keemat thiik thi, jeb me itne daam nahi tha
Ese hi ek baar main tum ko haar aaya tha.

Best Poems of Gulzar in Hindi

gulzar shayari in hindi pdf

gulzar shayari in hindi pdf

बुरा लगा तो होगा ऐ खुदा तुझे,
दुआ में जब,
जम्हाई ले रहा था मैं–
दुआ के इस अमल से थक गया हूँ मैं !
मैं जब से देख सुन रहा हूँ,
तब से याद है मुझे,
खुदा जला बुझा रहा है रात दिन,
खुदा के हाथ में है सब बुरा भला–
दुआ करो !
अजीब सा अमल है ये
ये एक फ़र्जी गुफ़्तगू,
और एकतरफ़ा–एक ऐसे शख्स से,
ख़याल जिसकी शक्ल है
ख़याल ही सबूत है.



मैं दीवार की इस जानिब हूँ .
इस जानिब तो धूप भी है हरियाली भी !
ओस भी गिरती है पत्तों पर,
आ जाये तो आलसी कोहरा,
शाख पे बैठा घंटों ऊँघता रहता है.
बारिश लम्बी तारों पर नटनी की तरह थिरकती,
आँखों से गुम हो जाती है,
जो मौसम आता है,सारे रस देता है !
लेकिन इस कच्ची दीवार की दूसरी जानिब,
क्यों ऐसा सन्नाटा है
कौन है जो आवाज नहीं करता लेकिन–
दीवार से टेक लगाए बैठा रहता है.

पिछली बार मिला था जब मैं
एक भयानक जंग में कुछ मशरूफ़ थे तुम
नए नए हथियारों की रौनक से काफ़ी खुश लगते थे
इससे पहले अन्तुला में
भूख से मरते बच्चों की लाश दफ्नाते देखा था
और एक बार …एक और मुल्क में जलजला देखा
कुछ शहरों के शहर गिरा के दूसरी जानिब
लौट रहे थे
तुम को फलक से आते भी देखा था मैंने
आस पास के सय्यारों पर धूल उड़ाते
कूद फलांग के दूसरी दुनियाओं की गर्दिश
तोड़ ताड़ के गेलेक्सीज के महवर तुम
जब भी जमीं पर आते हो
भोंचाल चलाते और समंदर खौलाते हो
बड़े ‘इरेटिक’ से लगते हो
काएनात में कैसे लोगों की सोहबत में रहते हो तुम

Agar Aap Dhoop Mein H To In Bacho Par Chaav Kijiye,
Aur Aap Chaav Mein Hai To Inn Par Dhoop Aane Dijiye,
Ye Viklang Bache, Mohtaaj Nahi Jaruratmand Hai,
Humdardi Aur Pyar Ke, Suraj Ki Pehli Roshani…..
Aarushi Yahi Karti Hai.

Gulzar Sahab Shayari in Hindi

gulzar-poetry-two-lines

gulzar-poetry-two-lines

निचोड़ अपनी आँखों को, के दो आंसू टपके और कुछ तो मेरी लाश को हुस्न मिले,
डाल दे अपने आँचल का टुकड़ा, के मेरी मय्यत पे कफ़न नही है.

कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए, भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं…!!

अच्छी किताबें और अच्छे लोग तुरंत समझमें नहीं आते उन्हें पढना पड़ता हैं..!!”

बहुत अंदर तक जला देती हैं, वो शिकायते जो बया नहीं होती…!!”

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..दूसरा सपना देखने के हौसले को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं..!!”

तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी, जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं…!!

घर में अपनों से उतनाही रूठो की आपकी बात और दूसरों की इज्जत, दोनों बरक़रार रह सके…!!

कौन कहता हैं की हम झूठ नहीं बोलते एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें ….!!

सीने में धड़कता जो हिस्सा हैं…. उसी का तो ये सारा किस्सा हैं..!!

कैसे करें हम ख़ुद को तेरे प्यार के काबिल, जब हम बदलते हैं, तुम शर्ते बादल देते हो..!!

किसी पर मर जाने से होती हैं मुहब्बत, इश्क जिंदा लोगों का नहीं..!!

शोर की तो उम्र होती हैं ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं…!!

कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती जब तक ख़ुद पर ना गुजरे..!!

शायर बनना बहुत आसान हैं… बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए…!!

वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं, हम भूल गए हैं रख के कहीं…!!

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं, रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं…!!

कभी तो चौक के देखे को हमारी तरफ़, किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे..!!

थोडासा हस के थोडासा रुलाके पल यही जानेवाले हैं..!!

वक्त रहता नहीं कही भी टिक कर, आदत इस की भी इंसान जैसी हैं…!!

हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं नहीं छोड़ा करते, वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते…!!

दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा, इसका शायद कोई हल नहीं हैं…!!

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा
देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,
जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा

थोड़ी देर ज़रा-सा और वहीं रुकतीं तो…
सूरज झांक के देख रहा था खिड़की से
एक किरण झुमके पर आकर बैठी थी,
और रुख़सार को चूमने वाली थी कि
तुम मुंह मोड़कर चल दीं और बेचारी किरण
फ़र्श पर गिरके चूर हुईं
थोड़ी देर, ज़रा सा और वहीं रूकतीं तो…

ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है

Gulzar Shayari in Hindi on Life

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है

ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी थी
उन की बात सुनी भी हम ने अपनी बात सुनाई भी

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा,
देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,
जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा.

तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे…
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे….

कैसी ये मोहर लगा दी तूने…
शीशे के पार से चिपका तेरा चेहरा
मैंने चूमा तो मेरे चेहरे पे छाप उतर आयी है उसकी,
जैसे कि मोहर लगा दी तूने…
तेरा चेहरा ही लिये घूमता हूँ, शहर में तबसे
लोग मेरा नहीं, एहवाल तेरा पूछते हैं, मुझ से !!

आँखों के पोछने से लगा आग का पता
यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ

वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है

राख को भी कुरेद कर देखो
अभी जलता हो कोई पल शायद



बोलिये सुरीली बोलियां,
खट्टी मीठी आँखों की रसीली बोलियां.
रात में घोले चाँद की मिश्री,
दिन के ग़म नमकीन लगते हैं.
नमकीन आँखों की नशीली बोलियां,
गूंज रहे हैं डूबते साए.
शाम की खुशबू हाथ ना आए,
गूंजती आँखों की नशीली बोलियां.

Gulzar sad Shayari in Hindi

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..
दूसरा सपना देखने के हौसले को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं..

आओ तुमको उठा लूँ कंधों पर
तुम उचककर शरीर होठों से चूम लेना
चूम लेना ये चाँद का माथा
आज की रात देखा ना तुमने
कैसे झुक-झुक के कोहनियों के बल
चाँद इतना करीब आया है

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

काँच के पार तिरे हाथ नज़र आते हैं
काश ख़ुशबू की तरह रंग हिना का होता

जब भी ये दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है
रात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहीं
कांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता है
ख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता है
चाँद की किरणों में वो रोज़ सा रेशम भी नहीं
चाँद की चिकनी डली है कि घुली जाती है
और सन्नाटों की इक धूल सी उड़ी जाती है
काश इक बार कभी नींद से उठकर तुम भी
हिज्र की रातों में ये देखो तो क्या होता है

मौत तू एक कविता है.
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको,
डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे
ज़र्द सा चेहरा लिये जब चांद उफक तक पहुँचे
दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब
ना अंधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन
जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब साँस आए
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको.

आदमी बुलबुला है पानी का
और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है,
फिर उभरता है, फिर से बहता है,
न समंदर निगला सका इसको, न तवारीख़ तोड़ पाई है,
वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का।

दिल में ऐसे ठहर गए हैं ग़म
जैसे जंगल में शाम के साये
जाते-जाते सहम के रुक जाएँ
मुडके देखे उदास राहों पर
कैसे बुझते हुए उजालों में
दूर तक धूल ही धूल उड़ती है

खाली डिब्बा है फ़क़त, खोला हुआ चीरा हुआ
यूँ ही दीवारों से भिड़ता हुआ, टकराता हुआ
बेवजह सड़कों पे बिखरा हुआ, फैलाया हुआ
ठोकरें खाता हुआ खाली लुढ़कता डिब्बा
यूँ भी होता है कोई खाली-सा- बेकार-सा दिन
ऐसा बेरंग-सा बेमानी-सा बेनाम-सा दिन

So this was our top selected Gulzar romantic Shayari in Hindi Collection. We hope you like it all. For more such Shayari of Gulzar Sahab in Hindi visit our other Shayari posts also. You can Also Download the Gulzar Sahab Shayari in PDF Format by Clicking Here.

If we have missed any Best of Gulzar Poetry then do comment below, we will try to add that here.